ध्यान कैसे मापा जाता है: रिएक्शन टाइम, फ़्लैंकर और विज़ुअल सर्च
मनोवैज्ञानिक ध्यान को छोटे टेस्ट से मापते हैं: सतर्कता के लिए किसी अनियमित समय पर आने वाले सिग्नल पर रिएक्शन टाइम, ध्यान भटकाने वाली चीज़ों को अनदेखा करने के लिए फ़्लैंकर टास्क, लक्ष्य ढूँढने के लिए विज़ुअल सर्च, और खुद को रोकने के लिए go/no-go टास्क। फ़ोन हर टैप में लगभग 50–100 ms की देरी जोड़ता है, और यह मात्रा हर डिवाइस में अलग होती है, इसलिए फ़ोन के परिणामों की तुलना लैब के मानकों से नहीं, बल्कि अपने ही पिछले परिणामों से करें।
§ 1ध्यान के क्लासिक टेस्ट
| टेस्ट | आप क्या करते हैं | यह क्या दिखाता है |
|---|---|---|
| साइकोमोटर विजिलेंस टास्क (PVT) | किसी अनियमित पल में सिग्नल दिखते ही टैप करें | सतर्कता; बहुत धीमे जवाब (चूक) नींद की कमी के साथ बढ़ते हैं |
| सस्टेन्ड अटेंशन टू रिस्पॉन्स टास्क (SART) | एक दुर्लभ लक्ष्य को छोड़कर हर अंक पर जवाब दें | लगातार ध्यान और अपने-आप होने वाले जवाब को रोकना |
| फ़्लैंकर टास्क | ध्यान भटकाने वाले तीरों के बीच वाले तीर की दिशा बताएँ | भटकाव को अनदेखा करना: तीर अलग दिशाओं में हों तो लगने वाला अतिरिक्त समय |
| विज़ुअल सर्च | तय करें कि लक्ष्य दूसरी चीज़ों के बीच मौजूद है या नहीं | ध्यान कितनी कुशलता से चुनता है: हर अतिरिक्त चीज़ की कीमत |
| ट्रेल मेकिंग | गोलों को क्रम से जोड़ें, फिर दो सीरीज़ के बीच बारी-बारी से | गति, और दो सेटों के बीच बदलना |
| Corsi ब्लॉक | ब्लॉक जिस क्रम में जले, वही दोहराएँ | जगह से जुड़ी वर्किंग मेमोरी की क्षमता |
हर टेस्ट उस चीज़ का एक छोटा हिस्सा अलग करके देखता है जिसे हम ध्यान कहते हैं। इनमें से कोई भी पूरे ध्यान को नहीं मापता, और कोई भी अपने आप में निदान नहीं है।
§ 2रिएक्शन टाइम और सतर्कता
साइकोमोटर विजिलेंस टास्क सबसे आसान और सबसे संवेदनशील टेस्ट में से एक है: अनियमित इंतज़ार के बाद एक सिग्नल आता है और आप जितनी जल्दी हो सके जवाब देते हैं। लैब का मानक वर्ज़न 10 मिनट का होता है; 3 मिनट का वर्ज़न, PVT-B, Basner और साथियों (2011) ने बनाया। शोधकर्ता जवाब की गति और चूक, यानी बहुत धीमे जवाबों को देखते हैं, जो थकान होने पर ज़्यादा बार होते हैं।
छोटे वर्ज़न समय के साथ खुद को ट्रैक करने के लिए काम के हैं, लेकिन ये पूरे लैब टेस्ट की जगह नहीं ले सकते: Antler और साथियों (2022) ने पाया कि 3 मिनट और 10 मिनट वाले वर्ज़न के नतीजे आपस में कम मेल खाते थे।
§ 3फ़्लैंकर और विज़ुअल सर्च: सीधी गति नहीं, अंतर
Eriksen और Eriksen (1974) के शुरू किए फ़्लैंकर टास्क में आप बीच वाले तीर की दिशा बताते हैं और उसके आसपास के तीरों को अनदेखा करते हैं। जब पड़ोसी तीर उल्टी दिशा में हों, तो आप धीमे हो जाते हैं; यही अंतर फ़्लैंकर इफ़ेक्ट है। विज़ुअल सर्च में, नीली पट्टियों के बीच एक नारंगी पट्टी ढूँढना तेज़ होता है, चाहे पट्टियाँ कितनी भी हों, जबकि रंग और दिशा दोनों से तय होने वाला लक्ष्य ढूँढने में हर अतिरिक्त चीज़ के साथ ज़्यादा समय लगता है (Treisman और Gelade, 1980; Wolfe, 1998)।
ये टेस्ट अंतर बताते हैं: टकराव की कीमत, हर चीज़ की कीमत। फ़ोन पर यही बात फ़ायदेमंद साबित होती है।
§ 4फ़ोन लैब से अलग क्यों हैं
लैब में ऐसे उपकरण होते हैं जिनकी टाइमिंग पता होती है। फ़ोन आपके छूने और ऐप के उसे दर्ज करने के बीच देरी जोड़ता है, और ऐप के कुछ बनाने और स्क्रीन पर उसके दिखने के बीच भी। Pronk और साथियों (2020) ने इसे एक रोबोटिक उँगली और लाइट सेंसर से मापा: Android पर रिएक्शन टाइम औसतन लगभग 70 ms ज़्यादा आँका गया। अलग-अलग डिवाइस में यह अतिरिक्त देरी लगभग 50–100 ms होती है, और हर फ़ोन में अलग होती है।
- फ़ोन पर मापे गए सीधे रिएक्शन टाइम की तुलना लैब के मानकों से या दूसरों के फ़ोन पर आए परिणामों से नहीं की जा सकती।
- एक ही डिवाइस पर देरी काफ़ी हद तक एक जैसी रहती है, इसलिए उसी फ़ोन पर आपके अपने परिणामों की तुलना समय के साथ की जा सकती है।
- स्थितियों के बीच के अंतर, जैसे फ़्लैंकर इफ़ेक्ट, ज़्यादातर देरी को काट देते हैं, और सटीकता व मेमोरी स्पैन भी।
§ 5एक नतीजा काफ़ी क्यों नहीं है
छोटे टेस्ट में उतार-चढ़ाव बहुत होता है। प्रदर्शन नींद, दिन के समय, अभ्यास और मोटिवेशन के साथ बदलता है। अंतर वाले स्कोर डिवाइस की देरी से ज़्यादा प्रभावित नहीं होते, लेकिन एक सेशन से दूसरे सेशन में ये सीधी गति से ज़्यादा बदलते हैं (Hedge, Powell और Sumner, 2018)। परिणाम तब ज़्यादा मायने रखते हैं जब आप टेस्ट को दिन के लगभग एक ही समय पर दोहराएँ और किसी एक स्कोर के बजाय अपना ट्रेंड और अपनी सामान्य रेंज देखें।
§ 6“ब्रेन ट्रेनिंग” पर एक बात
ध्यान वाले किसी टास्क का अभ्यास करने से आप उसी टास्क में बेहतर होते हैं। Simons और साथियों (2016) की एक बड़ी समीक्षा में पाया गया कि ब्रेन-ट्रेनिंग प्रोग्राम उन्हीं टास्क को बेहतर करते हैं जिनकी ट्रेनिंग दी गई, कभी-कभी उनसे काफ़ी मिलते-जुलते टास्क को भी, लेकिन रोज़मर्रा की सोच-समझ में सुधार के सबूत कम हैं। फ़ोन टेस्ट पर बढ़ता ट्रेंड टेस्ट के बारे में एक तथ्य है, इस बात का सबूत नहीं कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आपका ध्यान बदल गया है।
सवाल और जवाब
क्या फ़ोन टेस्ट से ध्यान की समस्याओं का निदान हो सकता है?
नहीं। फ़ोन पर छोटे टेस्ट क्लिनिकल टेस्ट नहीं हैं और इनसे ADHD या किसी दूसरी स्थिति का निदान नहीं हो सकता। अगर आप अपने ध्यान को लेकर चिंतित हैं, तो किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करें।
सामान्य रिएक्शन टाइम कितना होता है?
लैब अध्ययनों में, आराम किए हुए युवा वयस्कों का साधारण रिएक्शन टाइम अक्सर लगभग 250 ms होता है। फ़ोन पर डिवाइस की देरी की वजह से मापा गया समय ज़्यादा आता है, इसलिए इसके बजाय अपने ही पिछले परिणामों से तुलना करें।
दूसरे फ़ोन पर मेरा रिएक्शन टाइम अलग क्यों आता है?
हर फ़ोन टचस्क्रीन, सॉफ़्टवेयर और डिस्प्ले की वजह से अपनी अलग देरी जोड़ता है, लगभग 50–100 ms। परिणामों की तुलना सिर्फ़ एक ही डिवाइस पर करें।
क्या इन टेस्ट का अभ्यास करने से ध्यान बेहतर होता है?
इससे खुद इन टेस्ट में आपका प्रदर्शन बेहतर होता है। इस बात के सबूत कमज़ोर हैं कि ब्रेन-ट्रेनिंग गेम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ध्यान बेहतर करते हैं।