चेहरे के भाव पहचानने में बेहतर कैसे बनें: 7 टिप्स
फ़ीडबैक के साथ अभ्यास करें: एक चेहरा देखें, तय करें कि क्या हिला, फिर जवाब जाँचें और जो संकेत छूट गया उसे देखें। आँखों और भौंहों से शुरू करें, उन जोड़ों को समझें जिनमें भ्रम होता है, थोड़ा-थोड़ा और बार-बार अभ्यास करें, और अलग-अलग लोगों के चेहरे इस्तेमाल करें। ट्रेनिंग अध्ययन बताते हैं कि ऐसे अभ्यास से पहचान बेहतर होती है, फिर भी चेहरों से भावनाएँ पढ़ने के लिए संदर्भ और विनम्रता ज़रूरी है।
§ 1एक कौशल जिसे आप ट्रेन कर सकते हैं
भाव पहचानना अभ्यास से बेहतर होता है। रैंडमाइज़्ड अध्ययनों में फ़ीडबैक के साथ ट्रेनिंग से छोटे भावों पर सटीकता बढ़ी, और यह सुधार हफ़्तों तक बना रहा (Matsumoto और Hwang, 2011)। Hurley (2012) ने ट्रेनिंग के अलग-अलग तरीकों की तुलना की और पाया कि वर्णन, अभ्यास और फ़ीडबैक का मेल सबसे अच्छा काम करता है। नीचे दिए गए टिप्स इन्हीं नतीजों पर आधारित हैं।
दो चीज़ें सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं। पहली है फ़ीडबैक: तुरंत पता चलना कि आप सही थे या नहीं, और कौन-सा संकेत छूट गया। दूसरी है विविधता: अलग-अलग चेहरे, तीव्रता और अवधि, ताकि आप खास तस्वीरें याद करने के बजाय खुद संकेतों को सीखें। असली प्रगति जाँचने का अच्छा तरीका है ऐसे चेहरों पर टेस्ट, जिनके साथ आपने कभी अभ्यास नहीं किया।
§ 2सात टिप्स
- भावनाओं का नहीं, हरकतों का नाम लें। किसी भावना का नाम लेने से पहले बताएँ कि क्या हिला, जैसे “भीतरी भौंहें ऊपर, होंठों के कोने नीचे”। इससे आप सटीक रहते हैं कि आपने असल में क्या देखा।
- आँखों और भौंहों से शुरू करें। भय, क्रोध और उदासी ज़्यादातर चेहरे के ऊपरी हिस्से में दिखते हैं (Wegrzyn और साथी, 2017), फिर भी बहुत से लोग मुख्य रूप से मुँह को देखते हैं।
- उन जोड़ों को समझें जिनमें भ्रम होता है। भय और आश्चर्य, क्रोध और घृणा, तिरस्कार और हल्की मुस्कान: हर जोड़े को अलग करने वाले संकेतों को समझें (देखें भय बनाम आश्चर्य)।
- हमेशा फ़ीडबैक लें। बिना जाँचे अंदाज़ा लगाने से बहुत कम सीखते हैं। हर जवाब के बाद सही नाम और संकेत देखें, और फिर से देखें।
- थोड़ा-थोड़ा और बार-बार अभ्यास करें। हफ़्तों तक रोज़ कुछ मिनट का अभ्यास एक लंबे सेशन से बेहतर है; अंतराल पर अभ्यास सीखने की रिसर्च के सबसे पक्के नतीजों में से एक है (Cepeda और साथी, 2006)।
- हल्के और छोटे भाव भी शामिल करें। असली भाव अक्सर कमज़ोर, अधूरे या तेज़ होते हैं। जब पूरे भाव आसान लगने लगें, तो कम तीव्रता वाले चेहरों, सिर्फ़ आँखों और छोटे फ़्लैश का अभ्यास करें।
- चेहरे बदलते रहें। लोग अपने सांस्कृतिक समूह के भीतर भाव बेहतर पहचानते हैं (Elfenbein और Ambady, 2002), इसलिए अलग-अलग लोगों के चेहरों के साथ अभ्यास करें।
§ 3अभ्यास क्या करेगा और क्या नहीं
अभ्यास आपको उसी तरह के टास्क में बेहतर बनाता है जिसका आपने अभ्यास किया। Döllinger और साथियों (2021) ने ट्रेन की गई माइक्रो-एक्सप्रेशन पहचान में बड़ा सुधार पाया, लेकिन दूसरी स्थितियों में भावनात्मक संकेत पहचानने पर कोई असर नहीं। आम तौर पर भी, ट्रेनिंग मुख्य रूप से उन्हीं टास्क को बेहतर करती है जिनकी ट्रेनिंग दी गई (Simons और साथी, 2016)।
चेहरे की किसी हरकत को पहचानना यह जानने जैसा भी नहीं है कि कोई क्या महसूस कर रहा है। एक ही भाव का अलग-अलग स्थितियों में अलग मतलब हो सकता है (Barrett और साथी, 2019), और कितना भी अभ्यास किसी चेहरे को लाई डिटेक्टर नहीं बना सकता। जो आप नोटिस करें, उसे फ़ैसला नहीं, बल्कि सुनने और पूछने की वजह मानें।
§ 4रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इसका इस्तेमाल
- नोटिस करें, फिर पूछें: “आप अभी थोड़े हैरान लगे। क्या मैंने कुछ अप्रत्याशित कहा?”
- अकेले संकेतों के बजाय, व्यक्ति के सामान्य चेहरे से आए बदलावों पर ध्यान दें।
- याद रखें कि थकान, एकाग्रता, दर्द और संस्कृति, ये सब चेहरे को बदल देते हैं।
- किसी भाव के आधार पर कभी किसी को न परखें, न उस पर आरोप लगाएँ और न ही उसके बारे में फ़ैसले लें।
सवाल और जवाब
भाव पहचानने में बेहतर होने में कितना समय लगता है?
ट्रेनिंग अध्ययनों में छोटे प्रोग्राम के बाद सुधार देखा गया है, और यह सुधार हफ़्तों बाद भी बना रहा। कभी-कभार के लंबे सेशन से नियमित छोटा अभ्यास बेहतर काम करता है।
क्या मैं फ़ोटो या वीडियो से अभ्यास कर सकता हूँ?
हाँ, बशर्ते आप जवाब जाँच सकें। बिना फ़ीडबैक के अभ्यास से बहुत कम सीखते हैं।
क्या इससे मैं लोगों को बेहतर समझ पाऊँगा?
भाव पहचानना लोगों को समझने का बस एक छोटा हिस्सा है। ट्रेनिंग से अभ्यास वाले चेहरों पर पहचान बेहतर होती है; दूसरे सामाजिक कौशल बेहतर होने के सबूत सीमित हैं।
क्या अभ्यास से मैं बता पाऊँगा कि कोई झूठ बोल रहा है?
नहीं। रिसर्च बताती है कि लोग झूठ पकड़ने में तुक्के से बस थोड़ा ही बेहतर होते हैं, और यह साबित नहीं हुआ है कि भाव पहचानने की ट्रेनिंग से झूठ पकड़ने में सुधार होता है।